सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द? कारण और राहत के उपाय
ठंड का मौसम आते ही जोड़ों और घुटनों में दर्द व अकड़न की समस्या बढ़ जाती है। जानिए इसके मुख्य वैज्ञानिक कारण और इससे राहत पाने के आसान घरेलू व जीवनशैली उपाय।
सुबह उठते ही घुटनों में जकड़न, सीढ़ियां चढ़ते वक्त कंधों या उंगलियों में दर्द — ठंड बढ़ने के साथ बहुत से लोगों की यह परेशानी भी बढ़ जाती है। खासकर बुजुर्गों और पहले से गठिया (आर्थराइटिस) से पीड़ित लोगों के लिए यह समय काफी कष्टदायक हो सकता है। ठंडे तापमान में रोजमर्रा के कामों में भी परेशानी आने लगती है। आखिर ठंड के दिनों में ही जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ जाता है और इससे सुरक्षित रहने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द?
ठंड के मौसम में जोड़ों में दर्द और अकड़न बढ़ने के पीछे कुछ वैज्ञानिक और शारीरिक कारण होते हैं। तापमान में गिरावट आने पर शरीर का रक्त संचार मुख्य अंगों की तरफ केंद्रित हो जाता है, जिससे हाथ-पैरों और त्वचा के पास की रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं। इसके कारण जोड़ों तक पर्याप्त मात्रा में खून और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे मांसपेशियां और नसें कड़ी हो जाती हैं।
इसके अलावा, सर्दियों में वायुमंडलीय दबाव (बैरोमीटर प्रेशर) कम होने से जोड़ों के आसपास के ऊतक (टिश्यू) फैलते हैं, जिससे जोड़ों पर दबाव बढ़ता है और दर्द महसूस होने लगता है। ठंड के कारण शारीरिक गतिविधियां कम होना और पानी कम पीना भी इस समस्या को और बढ़ा देता है।
शरीर को गर्म रखना और लेयरिंग
- पर्याप्त गर्म कपड़े पहनें: ठंड के संपर्क में आने से जोड़ों की जकड़न बढ़ती है। इसलिए शरीर को विशेषकर घुटनों, टखनों और हाथों को गर्म कपड़ों से अच्छी तरह ढककर रखें।
- सर्द हवाओं से बचाव: ठंडी हवाओं या सीधे एसी-कूलर और ठंडे फर्श के संपर्क में न आएं। घर के अंदर भी हल्के गर्म मोजे पहनकर रखें।
- गर्म पानी की सिंकाई: जिस जोड़ में ज्यादा अकड़न या दर्द हो, वहां हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली से हल्की सिंकाई करें।
हल्की एक्सरसाइज और एक्टिविटी
सर्दियों में अक्सर लोग ठंड के कारण सुस्त हो जाते हैं और बिस्तर में अधिक समय बिताते हैं, जिससे जोड़ और अधिक अकड़ जाते हैं। जोड़ों को लचीला बनाए रखने के लिए घर के अंदर ही हल्की स्ट्रेचिंग, योग या धीमी गति से वॉक करें। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से जोड़ों के आसपास की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है। हालांकि, किसी भी भारी व्यायाम को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह जरूर लें।
खानपान और हाइड्रेशन का ध्यान
सर्दियों के मौसम में अक्सर प्यास कम लगती है, जिसके चलते लोग पानी कम पीते हैं। शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होने से जोड़ों के बीच का साइनोवियल फ्लूइड प्रभावित होता है, जो जोड़ों को चिकनाई देता है। इसलिए पर्याप्त गुनगुना पानी और हर्बल चाय का सेवन करते रहें।
इसके साथ ही अपनी डाइट में एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन कम करने वाले) खाद्य पदार्थों को शामिल करें:
- हल्दी, अदरक और लहसुन का सेवन जोड़ों की सूजन को कम करने में मददगार होता है।
- अखरोट, अलसी के बीज और ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर चीजें खाएं।
- हरी पत्तेदार सब्जियां और ताजे फल हड्डियों को मजबूत बनाते हैं।
तेल की मालिश और घरेलू नुस्खे
परंपरागत रूप से हल्के गर्म तेल से जोड़ों की मालिश करना बेहद फायदेमंद माना जाता है। सर्दियों में सरसों का तेल, महानारायण तेल या तिल के तेल को हल्का गुनगुना करके जोड़ों पर हल्के हाथों से मालिश करें। इससे उस हिस्से में रक्त संचार बेहतर होता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है। ध्यान रखें कि मालिश बहुत जोर से या दबाव देकर न करें।
डॉक्टर से कब संपर्क करें?
यदि जोड़ों का दर्द सामान्य घरेलू उपायों से ठीक न हो और रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें। अगर जोड़ में अचानक तेज सूजन आ जाए, लालिमा दिखे, छूने पर बहुत ज्यादा दर्द हो या चलने-फिरने में असमर्थता महसूस हो, तो तुरंत किसी आर्थोपेडिक्स या रुमेटोलॉजिस्ट विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लें। समय पर जांच और सही इलाज से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है।
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