बीएचयू और ऑस्ट्रेलिया मिलकर बनाएंगे मानव विकास का डेटाबेस, शोध पर हुआ समझौता
काशी हिंदू विश्वविद्यालय और ऑस्ट्रेलिया की ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी मानव विकास और उत्पत्ति पर साझा शोध करेंगे।
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) और ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी मिलकर मानव विकास तथा उसकी उत्पत्ति के रहस्यों को सुलझाने के लिए एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार करेंगे। दोनों संस्थानों के बीच 'पार्टनर ऑर्गनाइजेशन एग्रीमेंट' पर औपचारिक मुहर लग गई है। इस करार के तहत दोनों देश नैतिक अनुसंधान डेटा रिपॉजिटरी विकसित करेंगे, जिसमें शोधकर्ताओं को रॉयल्टी-मुक्त लाइसेंस के जरिए अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सामग्री का उपयोग करने की छूट मिलेगी administration।
मानव विकास: ग्लोबल साउथ और प्राचीन इतिहास पर केंद्रित होगा डेटाबेस
मानव विकास के वैश्विक अध्ययनों में अब तक दक्षिण एशियाई और विकासशील देशों के डेटा को उतनी प्राथमिकता नहीं मिल पाती थी, जिससे कई बार नतीजे पूर्वाग्रह से ग्रसित माने जाते थे। नया डेटाबेस इस कमी को पूरा करेगा। ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल समर्थित इस सात वर्षीय अंतरराष्ट्रीय परियोजना का कुल बजट लगभग 85 मिलियन डॉलर है।
बीएचयू के विज्ञान संस्थान स्थित जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे इस परियोजना में प्रमुख साझेदार अन्वेषक (पार्टनर इन्वेस्टिगेटर) की भूमिका निभा रहे हैं। वे विशेष रूप से 'ग्लोबल साउथ' और भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़े प्राचीन डीएनए, आबादी के आनुवंशिक इतिहास और मानव प्रवासन के आंकड़ों के संकलन तथा वैज्ञानिक विश्लेषण का जिम्मा संभालेंगे।
रॉयल्टी-मुक्त लाइसेंस और संयुक्त अनुसंधान का मॉडल
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, इस समझौते का मुख्य आधार शोध सामग्री का साझा इस्तेमाल है। इसके तहत दोनों संस्थानों के बीच होने वाले डेटाबेस एग्रीमेंट से शोध परिणाम और टूल्स साझा किए जा सकेंगे।
- रॉयल्टी-मुक्त उपयोग: दोनों विश्वविद्यालयों के शोधकर्ता बिना किसी वाणिज्यिक शुल्क के एक-दूसरे के डेटा और विश्लेषणात्मक टूल्स का इस्तेमाल कर सकेंगे।
- डेटा सुरक्षा: मानव नमूनों और आनुवंशिक जानकारियों के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय नैतिक मानकों का कड़ाई से पालन होगा।
- शुरुआत: समझौते की कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जनवरी 2027 से इसका जमीनी अनुसंधान कार्य शुरू होने की संभावना है।
शोधार्थियों और छात्रों को मिलेंगे नए अवसर
इस करार से बीएचयू के छात्रों और युवा वैज्ञानिकों के लिए वैश्विक स्तर के मौके खुलेंगे। परियोजना के तहत शोधार्थियों को ऑस्ट्रेलिया जाकर उन्नत आनुवंशिकी और पुरातत्व विज्ञान से जुड़ी तकनीकों पर काम करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, काशी के इस ऐतिहासिक परिसर में आधुनिक प्रयोगशाला सुविधाओं के विकास को भी बल मिलेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बीएचयू और ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के बीच किस बात का समझौता हुआ है?
यह समझौता मानव विकास, प्राचीन डीएनए और होमो सेपियन्स के प्रवासन के इतिहास पर साझा अनुसंधान करने और एक अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के लिए हुआ है।
रॉयल्टी-मुक्त लाइसेंस का क्या मतलब है?
इसका अर्थ है कि परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक और दोनों संस्थान बिना किसी अतिरिक्त रॉयल्टी या पेटेंट शुल्क के एक-दूसरे के शोध डेटा का शैक्षणिक उपयोग कर सकते हैं license।
इस शोध का नेतृत्व कौन कर रहा है?
वैश्विक स्तर पर इस सेंटर का नेतृत्व ग्रिफिथ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइकल पेट्राग्लिया कर रहे हैं, जबकि भारत और बीएचयू की ओर से जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे पार्टनर इन्वेस्टिगेटर हैं science।