वाराणसी: अस्सी घाट पर 'लॉन्ग नाइट ऑफ लिटरेचर्स', 9 देशों के साहित्यकार जुटे
वाराणसी के अस्सी घाट स्थित एलिस बोनर इंस्टीट्यूट में 'लॉन्ग नाइट ऑफ लिटरेचर्स' शुरू हो गया है, जहां यूरोप के नौ देशों के साहित्यकार पाठकों को अपनी रचनाएं सुना रहे हैं।
वाराणसी के अस्सी घाट पर गंगा किनारे साहित्य और संस्कृति का अनूठा अंतरराष्ट्रीय संगम देखने को मिल रहा है। अस्सी घाट स्थित ऐतिहासिक 'एलिस बोनर इंस्टीट्यूट' (B1/159) में सोमवार, 26 अक्टूबर की शाम बहुप्रतीक्षित साहित्यिक उत्सव 'लॉन्ग नाइट ऑफ लिटरेचर्स' (Long Night of Literatures) का आगाज हुआ। इस कार्यक्रम में यूरोप के नौ विभिन्न देशों से आए लेखक और कवि अपनी रचनाओं का पाठ कर रहे हैं और बनारस के पाठकों से सीधा संवाद साध रहे हैं—
अस्सी घाट: यूरोपीय साहित्यकारों और बनारस के पाठकों का मिलन
यूरोपीय संघ के सांस्कृतिक संस्थानों के समूह (EUNIC इंडिया) और स्थानीय एलिस बोनर इंस्टीट्यूट के सहयोग से यह आयोजन काशी में कराया जा रहा है। कार्यक्रम में पोलैंड की विख्यात लेखिका और रिपोर्टर मार्गो रेजमेर, इटली के एंटोनियो फ्रैंकिनी और स्विट्जरलैंड के कवि मार्को मिलादिनोविक समेत नौ देशों के प्रतिनिधि शामिल हैं। रचनाकार अपनी मूल भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी अनुवाद के जरिए पाठकों को वैश्विक समाज, इतिहास और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े पहलुओं से परिचित करा रहे हैं—
'स्पीड डेटिंग' जैसा अनोखा प्रारूप
इस साहित्यिक उत्सव का प्रारूप पारंपरिक मंच और माइक वाले सम्मेलनों से बिल्कुल अलग है। आयोजकों के अनुसार इसे संवाद आधारित फॉर्मेट पर तैयार किया गया है:
- श्रोताओं को 12 से 15 लोगों के छोटे-छोटे समूहों में बांटा जाता है।
- प्रत्येक लेखक एक अलग कमरे या बैठक कक्ष में करीब 20 मिनट तक अपनी कृति का पाठ करते हैं।
- निर्धारित समय पूरा होते ही समूह अगले लेखक के कक्ष में चला जाता है, जिससे पाठकों को सभी साहित्यकारों से सीधे सवाल पूछने का अवसर मिलता है।
काशी की समृद्ध परंपरा में नया वैश्विक अध्याय
कबीर, तुलसी और मुंशी प्रेमचंद की धरती बनारस में इस तरह का अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक विमर्श युवाओं और शोधार्थियों के लिए विशेष अनुभव लेकर आया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU), महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के छात्र, शोधार्थी और नगर के प्रबुद्ध नागरिक बड़ी संख्या में विदेशी साहित्य को समझने यहां पहुंच रहे हैं। गंगा के शांत प्रवाह के बीच विभिन्न यूरोपीय भाषाओं की गूंज ने अस्सी घाट के सांस्कृतिक माहौल को और गहरा रंग दिया है—
दर्शकों और साहित्य प्रेमियों के लिए जरूरी बातें
अस्सी घाट क्षेत्र में होने वाले इस दो दिवसीय आयोजन में भाग लेने के इच्छुक लोगों के लिए आयोजकों ने निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था रखी है। मुख्य सड़क और अस्सी चौराहे से घाट की तरफ पैदल या ई-रिक्शा के जरिए आसानी से पहुंचा जा सकता है। अस्सी घाट मार्ग पर शाम के समय सामान्य दिनों की तरह चहल-पहल अधिक रहने के कारण स्थानीय प्रशासन ने आने वाले आगंतुकों को वाहन घाट से पहले पार्किंग स्थलों पर खड़े करने का सुझाव दिया है—
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