पटना में आइसक्रीम फैक्ट्रियों पर खाद्य विभाग की छापेमारी: एक्सपायर्ड सामग्री नष्ट
त्योहारों से पहले पटना में खाद्य संरक्षा विभाग ने आइसक्रीम और डेयरी इकाइयों पर औचक छापेमारी की।
त्योहारों के मद्देनजर राजधानी पटना में मिलावटखोरी और अमानक खाद्य सामग्रियों के खिलाफ प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। खाद्य संरक्षा विभाग की विशेष टीमों ने शहर और आसपास के इलाकों में संचालित आइसक्रीम व डेयरी प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान गंभीर अस्वच्छता, बिना लेबल वाले उत्पाद और एक्सपायर्ड कच्चा माल पाए जाने पर 260 किलोग्राम से अधिक सामग्री को मौके पर नष्ट कराया गया तथा कई कारोबारियों को नोटिस जारी किया गया है——।
आइसक्रीम: गोल्डन डेयरी और स्नो बॉल यूनिट पर कड़ी कार्रवाई
विभाग की ओर से जारी विवरण के अनुसार, पाटलिपुत्र औद्योगिक क्षेत्र स्थित मेसर्स गोल्डन डेयरी प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड में जांच के दौरान फ्रोजन स्टोरेज क्षेत्र में भारी गंदगी पाई गई। वहां बटर के भंडारण और कृत्रिम बटर के इस्तेमाल में भी खामियां मिलीं। अधिकारियों ने उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाई गई 442 आइसक्रीम, जिसमें 244 पीस चोको बार और 198 पीस अमर बार शामिल थीं, को मौके पर ही नष्ट करा दिया—।
वहीं मनेर के माधोपुर स्थित स्नो बॉल आइसक्रीम निर्माण इकाई में हालात और भी खराब मिले। यहां 100 किलो बिना लेबल वाला स्किम्ड मिल्क पाउडर, 120 किलो एक्सपायर्ड मैंगो पल्प, 20 किलो एक्सपायर्ड ड्राइड ब्लैक करंट और 20 किलो एक्सपायर्ड चॉकलेट विकल्प बरामद हुआ। इस करीब 80,720 रुपये मूल्य की 260 किलो सामग्री को जमीन में गड्ढा खोदकर और राख डालकर नष्ट कराया गया—। इकाई के पास कर्मचारियों के स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, पानी की लैब जांच रिपोर्ट और परिवहन वाहन के कागजात भी उपलब्ध नहीं थे।
बिना मैन्युफैक्चरिंग तारीख के बिक्री पर रोक, मक्खन जब्त
जांच अभियान के तहत खेमनीचक स्थित सलोनी एंटरप्राइजेज का भी निरीक्षण हुआ—। यहां तैयार आइसक्रीम के पैकेटों पर बैच नंबर और निर्माण तिथि दर्ज नहीं थी, जिसके चलते अधिकारियों ने उत्पादों की बिक्री पर तुरंत रोक लगा दी—।
कुम्हरार स्थित पॉपुलर स्नोमैन कोल्ड स्टोरेज में बिना बैच नंबर के रखे गए 160 किलोग्राम मक्खन को जब्त किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 43 हजार रुपये बताई गई है—। अनीसाबाद में एक आइसक्रीम वाहन का पंजीकरण न होने पर कार्रवाई की गई और फ्रोजन ग्रीन पीज के नमूने लिए गए। कई अन्य स्थानों से भी आइसक्रीम और डेयरी उत्पादों के नमूने लेकर सरकारी प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं—।
14 दिनों का अल्टीमेटम: नहीं सुधरे तो रद्द होगा लाइसेंस
खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 32 के तहत संबंधित प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस थमाए गए हैं—। कारोबारियों को कमियों को दूर करने के लिए 14 दिन की समय-सीमा दी गई है—।
- स्वच्छता मानक: कोल्ड स्टोरेज और निर्माण क्षेत्र में हाइजीन का सख्ती से पालन करना होगा।
- स्वास्थ्य प्रमाण पत्र: खाद्य सामग्री तैयार करने वाले प्रत्येक कर्मचारी का मेडिकल फिटनेस रिकॉर्ड अनिवार्य होगा।
- लेबलिंग नियम: हर उत्पाद पर बैच नंबर, उत्पादन तिथि, एक्सपायरी और सामग्री की स्पष्ट जानकारी देनी होगी—।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि में इन कमियों को दूर नहीं किया गया, तो संबंधित फर्मों के खाद्य लाइसेंस निलंबित या पूरी तरह रद्द कर दिए जाएंगे—।
दीपावली और छठ पर्व से पहले पूरे राज्य में निगरानी
बिहार में त्योहारी सीजन के दौरान मिलावटी खोया, पनीर, तेल और मिठाइयों की खपत तेजी से बढ़ती है। इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग और खाद्य संरक्षा आयुक्त के स्तर से सभी जिलों में लगातार सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लोगों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पटना में आइसक्रीम फैक्ट्रियों पर क्या कार्रवाई हुई है?
खाद्य संरक्षा विभाग ने अमानक और एक्सपायर्ड सामग्री मिलने पर 260 किलो कच्चा माल नष्ट कराया, 442 आइसक्रीम नष्ट कीं, 160 किलो मक्खन जब्त किया और बिना विवरण वाले उत्पादों की बिक्री रोकी है—।
खाद्य प्रतिष्ठानों को सुधार के लिए कितना समय दिया गया है?
खाद्य सुरक्षा कानून की धारा 32 के तहत सभी संबंधित प्रतिष्ठानों को 14 दिनों के भीतर पाई गई कमियों को दूर करने का निर्देश दिया गया है—।
उपभोक्ता खराब या मिलावटी खाद्य उत्पाद की शिकायत कहां कर सकते हैं?
उपभोक्ता राज्य खाद्य संरक्षा विभाग के आधिकारिक पोर्टल या स्थानीय फूड सेफ्टी ऑफिसर के कार्यालय में बिल और उत्पाद के विवरण के साथ सीधी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।