वाराणसी: बाढ़ के बाद घाटों पर सिल्ट हटाने की मशक्कत जारी, फिसलन से श्रद्धालु परेशान
गंगा का जलस्तर घटने के बाद वाराणसी के घाटों पर सिल्ट और गंदगी हटाने के लिए नगर निगम का सफाई अभियान जारी है, हालांकि कई घाटों पर अब भी फिसलन से श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है।
वाराणसी में गंगा का जलस्तर सामान्य होने के बाद अब घाटों और तटीय इलाकों से बाढ़ के निशान मिटाने की कवायद तेज हो गई है। कई दिनों से नगर निगम के सैकड़ों सफाईकर्मी घाटों पर जमी गाद और कीचड़ हटाने में जुटे हैं, लेकिन अभी भी कई प्रमुख घाटों पर मिट्टी की मोटी परत और फिसलन बरकरार है जिससे सुबह-शाम स्नान और दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को खासी दिक्कत हो रही है।
वाराणसी: सीढ़ियों पर कई फीट तक जमी है गाद
गंगा का पानी जब सीढ़ियों से नीचे उतरा, तो अपने पीछे भारी मात्रा में बालू, काली मिट्टी और कचरा छोड़ गया। अस्सी घाट, अहिल्याबाई घाट, दशाश्वमेध, दरभंगा, मणिकर्णिका और राजघाट तक पक्के घाटों के चबूतरे और सीढ़ियां सिल्ट से पटे नजर आ रहे हैं। कई जगहों पर तो तीन से चार फीट तक गाद की परत जम गई है, जो धूप में सूखकर कड़े टीलों की शक्ल ले रही है।
स्थानीय पुरोहितों और घाट किनारे रहने वालों का कहना है कि जब तक यह मिट्टी पूरी तरह गीली रहती है, तब तक इसे पानी के दबाव से धोना आसान होता है। सूख जाने के बाद इसे फावड़ों और बेलचों से काटकर हटाना पड़ता है, जिसमें कई गुना अधिक समय और श्रम लगता है।
नाव संचालन और दैनिक कर्मकांड पर असर
घाटों पर फैली गाद के कारण गंगा किनारे का संपर्क मार्ग भी बाधित हुआ है। मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट जैसे अंत्येष्टि स्थलों पर आने वाले शवयात्रियों को फिसलती सीढ़ियों पर संभलकर चलना पड़ रहा है। वहीं, नाविकों के सामने भी नौकाओं को किनारे लगाने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है।
- नावों तक पहुंचने के लिए नाविकों ने बांस की बल्लियों और तख्तों के सहारे अस्थायी रास्ते बनाए हैं।
- दलदल जैसी स्थिति के चलते दूर-दराज से आने वाले बुजुर्ग तीर्थयात्रियों को जल तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ रही है।
- दुकानदारों और पंडा समाज की चौकियों के आसपास भी गंदगी और सीलन की वजह से बदबू की समस्या बनी हुई है।
पंप और मशीनों के जरिए घाटों की धुलाई
नगर निगम प्रशासन ने स्थिति को देखते हुए घाटों को अलग-अलग क्लस्टरों में बांटकर सफाई अभियान की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। जहां भारी मशीनें पहुंच सकती हैं, वहां जेसीबी के जरिए मिट्टी को हटाया जा रहा है, जबकि संकरे घाटों पर हाई-प्रेशर वॉटर पंपों की मदद से सिल्ट को धोकर साफ किया जा रहा है।
प्रशासन का लक्ष्य है कि आगामी कार्तिक माह के प्रमुख पर्वों और देव दीपावली से पहले सभी 84 पक्के घाटों को पूरी तरह चमका दिया जाए। इसके साथ ही नमामि गंगे की टीमें और स्थानीय स्वयंसेवक भी नदी के किनारों पर फंसी प्लास्टिक और पुरानी पूजन सामग्री को निकालने में सहयोग कर रहे हैं।
संक्रमण का खतरा, दवा छिड़काव और सावधानी
बाढ़ का पानी हटने के बाद संक्रामक रोगों के फैलाव का जोखिम भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग और नगर स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देश पर घाटों के ऊपरी हिस्सों और प्रभावित तटीय बस्तियों में चूना, ब्लीचिंग पाउडर और एंटी-लार्वा दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
नगर निगम ने नागरिकों और पर्यटकों से अपील की है कि जब तक सीढ़ियां पूरी तरह सूखकर साफ नहीं हो जातीं, तब तक काई और गीली मिट्टी वाले स्थानों पर अत्यंत सतर्कता से चलें। यदि किसी घाट पर अत्यधिक गंदगी या नाले के बैकफ्लो की शिकायत हो, तो नागरिक नगर निगम के कंट्रोल रूम के टोल-फ्री नंबर 1533 पर सूचना दर्ज करा सकते हैं ताकि मौके पर अतिरिक्त सफाई दल भेजा जा सके।
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