वाराणसी MLC चुनाव: दोनों सीटों पर हार के बाद BJP में मंथन, भितरघात पर उठे सवाल
वाराणसी खंड शिक्षक और स्नातक दोनों एमएलसी सीटों पर करारी हार के बाद भाजपा के भीतर अंतर्कलह और भितरघात को लेकर समीक्षा तेज हो गई है।
वाराणसी MLC चुनाव: उत्तर प्रदेश विधान परिषद के वाराणसी खंड शिक्षक और स्नातक दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद संगठन के भीतर सियासी घमासान तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र काशी समेत पूर्वांचल के आठ जिलों में फैले इस निर्वाचन क्षेत्र में दोनों सीटों पर समाजवादी पार्टी ने अपना कब्जा बरकरार रखा है। पहड़िया मंडी मतगणना केंद्र पर नतीजे साफ होने के बाद अब सत्ताधारी दल में हार के कारणों, अंदरूनी कलह और संभावित भितरघात को लेकर गंभीर चर्चा शुरू हो चुकी है।
वाराणसी MLC चुनाव: आठ जिलों में भारी भरकम फौज, फिर भी नहीं संभली बाजी
वाराणसी खंड के दायरे में कुल आठ जिले आते हैं—वाराणसी, चंदौली, गाजीपुर, जौनपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही और बलिया। इस पूरे परिक्षेत्र में भाजपा और उसके सहयोगी दलों के पास एक केंद्रीय मंत्री समेत 11 मंत्री और 33 से ज्यादा विधायक हैं। इसके बावजूद शिक्षक और स्नातक दोनों ही सीटों पर पार्टी को बड़े अंतर से शिकस्त का सामना करना पड़ा। पार्टी के भीतर ही यह सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े जनप्रतिनिधि वर्ग और विशाल संगठन के होते हुए भी कार्यकर्ता मतदाताओं को पोलिंग बूथ तक लाने में क्यों पिछड़ गए?
कार्यकर्ताओं की उपेक्षा और भीतरघात के आरोप
पार्टी की स्थानीय इकाइयों में चर्चा है कि चुनाव प्रचार के दौरान जमीनी कैडर और कॉडर कार्यकर्ताओं की बड़े पैमाने पर अनदेखी की गई। संगठन से जुड़े कई पदाधिकारियों का मानना है कि पार्टी के भीतर मौजूद गुटबाजी के चलते अपनों ने ही भीतरघात किया:
- प्रत्याशी चयन पर सवाल: शिक्षक सीट पर स्थानीय संगठन की पसंद के बजाय बाहरी चेहरे को तरजीह दिए जाने से कार्यकर्ताओं के एक धड़े में नाराजगी थी।
- प्रबंधन की कमजोरी: स्नातक मतदाताओं तक सीधे संपर्क और पर्ची वितरण में लचर व्यवस्था देखने को मिली।
- कर्मचारियों के मुद्दे: पुरानी पेंशन और शिक्षकों की स्थानीय समस्याओं को लेकर शिक्षक वर्ग में असंतोष था, जिसका फायदा विपक्षी खेमे को मिला।
सपा ने बढ़ाया जीत का अंतर
पहड़िया मंडी में संपन्न हुई मतगणना में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने निर्णायक बढ़त हासिल की। शिक्षक सीट पर सपा के लाल बिहारी यादव ने भाजपा के डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,000 से अधिक मतों से पराजित किया। वहीं स्नातक सीट पर भी सपा के आशुतोष सिन्हा ने अपनी पुरानी बढ़त को और मजबूत करते हुए भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह को पीछे छोड़ दिया। लगातार दूसरी बार इन दोनों सीटों पर सपा की जीत ने यह साबित किया है कि विपक्षी दल ने डेटा मैनेजमेंट और काउंटर पोलिंग की बेहतर तैयारी की थी।
आगे की राह: लखनऊ और काशी में होगी समीक्षा
इस चुनावी नतीजे का असर भले ही सरकार की स्थिरता पर न पड़े, लेकिन आने वाले विधानसभा चुनावों के लिहाज से यह परिणाम संगठन के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, काशी क्षेत्र से लेकर प्रदेश नेतृत्व तक इस बात की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है कि किस जिले और किस विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशियों को कम वोट मिले। जिन पदाधिकारियों पर भितरघात या निष्क्रियता के आरोप लगे हैं, उन पर आने वाले दिनों में सांगठनिक कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है।
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