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रवि, 1 नवंबर 2026अपडेट 02:36 PM IST
राजस्थान

राजस्थान में सीनियर IAS शिखर अग्रवाल APO, विला खरीद विवाद पर कार्मिक विभाग का एक्शन

राजस्थान सरकार ने 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल को पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा (APO) में डाल दिया है। यह कदम 40 विला-कॉटेज खरीद से जुड़े विवाद के बाद उठाया गया है।

Ashish ·
प्रतीकात्मक तस्वीर — फोटो: HiteshHtSharma / Pixabay

राजस्थान सरकार के कार्मिक विभाग ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (उद्योग) शिखर अग्रवाल को तत्काल प्रभाव से पदस्थापन आदेश की प्रतीक्षा (APO) में डाल दिया है। 1993 बैच के इस वरिष्ठ आईएएस अधिकारी और उनके परिवार के नाम पर करीब ढाई साल में 40 विला और कॉटेज खरीदे जाने का मामला सामने आने के बाद राज्य प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया है ।

शिखर अग्रवाल: क्या है 40 विला और कॉटेज से जुड़ा पूरा मामला?

प्रशासनिक हलकों में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर एक ही कंपनी से राजस्थान के दो अलग-अलग पर्यटन स्थलों पर संपत्तियां खरीदी गई थीं। इनमें अलवर जिले के अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर के बुझड़ा क्षेत्र में 20 कॉटेज शामिल हैं।

इन सभी संपत्तियों की कुल रजिस्ट्री कीमत करीब 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है। सौदे का सबसे चर्चित पहलू यह रहा कि संपत्तियां खरीदने के बाद इन्हें उसी निजी कंपनी को वापस लीज पर दे दिया गया। लीज एग्रीमेंट के तहत अजबगढ़ के विला से 5 लाख रुपये प्रति विला सालाना और उदयपुर के कॉटेज से 4 लाख रुपये प्रति कॉटेज सालाना किराया तय हुआ, जिससे कुल सालाना आय करीब 1.80 करोड़ रुपये बनती है ।

कार्मिक विभाग के आदेश में क्या है?

कार्मिक विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में इस कार्रवाई की वजह 'प्रशासनिक कारण' बताई गई है। इस आदेश के साथ ही शिखर अग्रवाल से उनके सभी मौजूदा प्रशासनिक प्रभार तत्काल वापस ले लिए गए हैं।

  • वे उद्योग एवं वाणिज्य विभाग तथा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव पद पर तैनात थे।
  • उनके पास राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) के अध्यक्ष पद की भी जिम्मेदारी थी।
  • इसके अलावा दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) और भिवाड़ी इंटीग्रेटेड विकास प्राधिकरण के दायित्व भी उनके पास थे, जिनसे उन्हें मुक्त कर दिया गया है।

आईआईटी से प्रशासनिक सेवा तक का सफर

कानपुर के मूल निवासी शिखर अग्रवाल ने आईआईटी कानपुर से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। वर्ष 1993 में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चुने गए। राजस्थान कैडर में उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है ।

वे राज्य में वन एवं पर्यावरण विभाग के एसीएस, जल संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के आयुक्त जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। इसके अलावा बीकानेर, उदयपुर, हनुमानगढ़ और जालोर जिलों में वे जिला कलेक्टर के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं। मौजूदा सरकार के शुरुआती दौर में वे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) में अतिरिक्त मुख्य सचिव की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं ।

प्रशासनिक नियमों और अचल संपत्ति के ब्योरे पर उठे सवाल

सिविल सेवा आचरण नियमों के अनुसार, किसी भी लोक सेवक को अपनी और अपने आश्रित पारिवारिक सदस्यों की अचल संपत्ति का सालाना ब्योरा (IPR) सरकार को अनिवार्य रूप से सौंपना होता है। इतने बड़े पैमाने पर एक ही व्यावसायिक समूह से संपत्ति की खरीद और उसी कंपनी से भारी-भरकम वार्षिक लीज रेंटल हासिल करने के तौर-तरीकों ने नियमों के अनुपालन को लेकर बहस छेड़ दी है। राज्य की नौकरशाही और राजनीतिक गलियारों में अब इस बात पर नजर टिकी है कि एपीओ किए जाने के बाद क्या इस सौदे की कोई औपचारिक जांच भी बैठाई जाती है ।

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