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बीएचयू में राष्ट्रीय रेडियोलॉजी सम्मेलन शुरू: AI और कैंसर के सटीक इलाज पर मंथन

बीएचयू के आईएमएस में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन 'रिकॉन-2026' में देशभर के रेडियोलॉजिस्ट जुटे हैं। इसमें एआई तकनीक, कैंसर और स्ट्रोक की आधुनिक जांच पर चर्चा हो रही है।

Ashish ·
प्रतीकात्मक तस्वीर — फोटो: jarmoluk / Pixabay

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (आईएमएस) में शनिवार, 31 अक्टूबर से दो दिवसीय राज्यस्तरीय व राष्ट्रीय रेडियोलॉजी सम्मेलन 'रिकॉन-2026' (RECON-2026) की शुरुआत हो गई है। इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन (आईआरआईए) के उत्तर प्रदेश चैप्टर के इस 38वें वार्षिक सम्मेलन में देशभर से वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट, कैंसर विशेषज्ञ और शोधार्थी जुटे हैं। दो दिनों तक चलने वाले इस महामंथन का मुख्य केंद्र मेडिकल इमेजिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग और कैंसर व स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों की शुरुआती पहचान है।

बीएचयू: आईयूसीटीई सभागार में शुरू हुआ दो दिवसीय मंथन

सम्मेलन का आयोजन बीएचयू परिसर स्थित शिक्षक शिक्षा अंतर-विश्वविद्यालय केंद्र (IUCTE) में किया जा रहा है। आईएमएस बीएचयू के रेडियोडायग्नोसिस एवं इमेजिंग विभाग की देखरेख में आयोजित इस कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार की मौजूदगी में तय किया गया है। आयोजन समिति के अनुसार, दो दिनों के दौरान तीन अलग-अलग सभागारों में वैज्ञानिक सत्र, शोध पत्रों की प्रस्तुति और विशेषज्ञों की व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।

कैंसर और स्ट्रोक की पहचान में कैसे मदद करेगा AI?

सम्मेलन के तकनीकी सत्रों में इस बात पर विशेष चर्चा हो रही है कि कैसे रेडियोलॉजी में आधुनिक सॉफ्टवेयर और एआई एल्गोरिदम डॉक्टरों के काम को आसान और अधिक सटीक बना रहे हैं। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि ब्रेन स्ट्रोक और ट्यूमर के मामलों में समय सबसे बड़ा कारक होता है। सीटी स्कैन और एमआरआई जांच में एआई की मदद से कुछ ही सेकंड में क्लॉट या ट्यूमर के सटीक स्थान और आकार का विश्लेषण किया जा सकता है, जिससे मरीज को 'गोल्डन ऑवर' के भीतर सही इलाज मिलना संभव हो पाता है।

बिना बड़े ऑपरेशन के कैंसर के इलाज पर व्याख्यान

रेडियोलॉजी अब केवल जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि 'इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी' के जरिए गंभीर बीमारियों का न्यूनतम चीर-फाड़ वाला इलाज भी कर रही है। सम्मेलन में लिवर कैंसर और अन्य जटिल गांठों के ऐसे आधुनिक उपचारों पर सत्र रखे गए हैं, जिनमें मरीज को बड़ा ऑपरेशन कराए बिना सीधे प्रभावित नस के जरिए दवा पहुंचाकर ट्यूमर को नष्ट किया जाता है। इसके अलावा महिलाओं में स्तन कैंसर की समय पर स्क्रीनिंग, कार्डियक एमआरआई और स्पेक्ट्रल सीटी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग पर भी देश के शीर्ष विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा कर रहे हैं।

पूर्वांचल और आसपास के मरीजों को क्या मिलेगा लाभ?

बीएचयू का सर सुंदरलाल अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर न केवल वाराणसी, बल्कि समूचे पूर्वांचल, पश्चिमी बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश के लाखों मरीजों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। इस सम्मेलन से स्थानीय डॉक्टरों और जूनियर रेजीडेंट्स को रेडियोलॉजी की वैश्विक तकनीकों का सीधा प्रशिक्षण मिलेगा। इसका सीधा लाभ सरकारी अस्पतालों में आने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय मरीजों को मिलेगा, जिनकी जटिल बीमारियों की पहचान अब स्थानीय स्तर पर ही शुरुआती चरण में हो सकेगी।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

रिकॉन-2026 सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इस सम्मेलन का उद्देश्य रेडियोलॉजी और मेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में आई नई तकनीकों, विशेषकर एआई और इंटरवेंशनल प्रक्रियाओं को साझा करना है, ताकि गंभीर बीमारियों की जांच और इलाज अधिक सटीक हो सके।

यह आयोजन कहां और कब तक हो रहा है?

यह दो दिवसीय सम्मेलन बीएचयू परिसर में स्थित आईयूसीटीई (IUCTE) भवन में 31 अक्टूबर और 1 नवंबर 2026 को आयोजित किया जा रहा है |

क्या इस आयोजन से आम मरीजों की ओपीडी सेवाओं पर असर पड़ेगा?

नहीं, सम्मेलन अकादमिक सत्रों और कार्यशालाओं के रूप में अलग केंद्र पर आयोजित है, इसलिए बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की नियमित ओपीडी और आपातकालीन सेवाएं सामान्य रूप से जारी हैं।

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