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भूटान में ग्लेशियल झील फटने से असम और बंगाल में बाढ़ का अलर्ट, हजारों लोग शिफ्ट

भूटान के गासा जिले में शिनताफू ग्लेशियल झील फटने के बाद संकोश नदी के जलस्तर में भारी बढ़ोतरी का खतरा पैदा हो गया है, जिससे पश्चिम बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।

Ashish ·
प्रतीकात्मक तस्वीर — फोटो: dimitrisvetsikas1969 / Pixabay

भूटान में ग्लेशियल झील: भूटान के उच्च हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियल झील फटने (GLOF) के बाद भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में बड़ा खतरा पैदा हो गया है। मो छू (Mo Chhu) और संकोश नदी में भारी मात्रा में पानी और मलबा आने के चलते पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों और असम के सीमावर्ती इलाकों में बाढ़ का हाई अलर्ट जारी किया गया है। प्रशासन ने संकोश नदी और उसकी सहायक नदियों के किनारे बसे हजारों लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाना शुरू कर दिया है।

भूटान में ग्लेशियल झील: कैसे हुआ हादसा और कहां फूटी झील?

यह घटना भूटान के पश्चिमोत्तर गासा जिले में स्थित शिनताफू (Shintaphu) ग्लेशियल झील में हुई। तापमान और प्राकृतिक दबाव के कारण झील का प्राकृतिक बांध टूटा और अनुमान के मुताबिक लगभग 74 लाख क्यूबिक मीटर पानी तीव्र गति से नीचे की ओर बह निकला।

झील का पानी मो छू नदी से होते हुए पुनात्सांगछू और आगे संकोश नदी की ओर बढ़ रहा है। भूटान में इस जलप्रवाह से प्रसिद्ध गासा साचू गर्म पानी के स्रोत का ढांचा और एक सौर सिंचाई परियोजना आंशिक रूप से प्रभावित हुई है, हालांकि समय रहते चेतावनी मिलने के कारण वहां किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

असम और पश्चिम बंगाल के इन जिलों पर खतरा

भूटान से निकलने वाली नदियां सीधे असम के ब्रह्मपुत्र बेसिन और उत्तर बंगाल के मैदानी इलाकों में प्रवेश करती हैं। इसी वजह से सीमा से सटे इलाकों में भारी तबाही की आशंका को देखते हुए विशेष चेतावनी जारी की गई है:

  • पश्चिम बंगाल: अलीपुरद्वार, कूचबिहार और जलपाईगुड़ी के निचले इलाकों में संकोश व अन्य सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है।
  • असम: कोकराझार, धुबरी, चिरांग और बक्सा जिले के नदी तटीय गांवों को अलर्ट पर रखा गया है।

प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद, राहत शिविर बनाए गए

नदी किनारे रहने वाले परिवारों को तुरंत घर खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। अलीपुरद्वार जिले में सरकारी स्कूलों और पक्के भवनों को राहत शिविरों में तब्दील किया गया है, जहां लगभग 10,000 लोगों को सुरक्षित पहुंचाया गया है।

आपदा प्रबंधन टीमों (SDRF और NDRF) को तटवर्ती इलाकों में तैनात किया गया है और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक लगातार लाउडस्पीकर के जरिए लोगों को सतर्क कर रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत और भूटान के जल संसाधन विभाग लगातार संपर्क में हैं ताकि जलस्तर की हर मिनट निगरानी की जा सके।

क्या होता है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट (GLOF)?

हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर पिघलने से उनके आगे प्राकृतिक पत्थरों और मिट्टी की दीवारों से घिरी झीलें बन जाती हैं। जब तापमान बढ़ने या भारी बर्फबारी की वजह से पानी की मात्रा बहुत ज्यादा हो जाती है, तो ये कमजोर दीवारें अचानक टूट जाती हैं। इसे ही तकनीकी भाषा में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) कहा जाता है। इसमें कुछ ही मिनटों में लाखों गैलन पानी तेज रफ्तार से निचले इलाकों की ओर दौड़ पड़ता है, जिससे संभलने का बहुत कम समय मिलता है।

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