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गुरु, 5 नवंबर 2026अपडेट 06:47 PM IST
हेल्थ

El Niño का असर: तेलंगाना में हेल्थ एडवाइजरी जारी, जानें बीमारी और गर्मी से बचाव के तरीके

अल नीनो के चलते शुष्क मौसम और बढ़ते तापमान को देखते हुए तेलंगाना स्वास्थ्य विभाग ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पानी से फैलने वाली बीमारियों और लू से सतर्क रहने की अपील की गई है।

Ashish ·
प्रतीकात्मक तस्वीर — फोटो: Ri_Ya / Pixabay

प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो (El Niño) के असर से दक्षिण भारत में मौसम का मिजाज असामान्य बना हुआ है। तेलंगाना में लंबे समय से बारिश की कमी, सूखे के हालात और नवंबर में भी सामान्य से अधिक तापमान को देखते हुए जन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को एक विस्तृत हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी दी है कि शुष्क मौसम और जल स्रोतों में कमी के कारण जलजनित संक्रमण (waterborne diseases) और गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है।

El Niño: अल नीनो की वजह से क्यों बढ़ी स्वास्थ्य विभाग की चिंता?

मौसम विभाग के अनुसार अल नीनो परिस्थितियों के चलते कई इलाकों में मॉनसून कमजोर रहा और सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज हुई है। जलाशयों में पानी का स्तर घटने और तापमान बढ़ने से जल संकट गहराने लगा है। जन स्वास्थ्य निदेशक डॉ. बी. रविंद्र नायक के अनुसार, ऐसे मौसम में सुरक्षित पेयजल की कमी, डिहाइड्रेशन, हीटस्ट्रोक और कुपोषण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसी स्थिति से निपटने के लिए नागरिकों और स्थानीय प्रशासन को पहले से सतर्क किया गया है।

पीने के पानी को लेकर बरतें ये सावधानियां

जलजनित बीमारियों जैसे डायरिया, टाइफाइड और पीलिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  • पानी उबालकर पिएं: पीने का पानी इस्तेमाल करने से पहले उसे कम से कम 10 से 15 मिनट तक अच्छी तरह उबालें या सरकारी मानकों के अनुसार क्लोरीन की गोलियों का प्रयोग करें।
  • असुरक्षित स्रोतों से बचें: खुले कुओं, अप्रमाणित बोरवेल या अनफिल्टर्ड टैंकरों के पानी को बिना शुद्ध किए सीधे न पिएं।
  • जल संरक्षण और स्वच्छता: पानी भरने और रखने वाले बर्तनों को रोजाना साफ करें और हमेशा ढककर रखें।

धूप और डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए क्या करें?

नवंबर के महीने में भी दिन के समय तेज धूप और शुष्क हवाएं चल रही हैं। शरीर में पानी की कमी न होने पाए, इसके लिए दिशा-निर्देशों में कई जरूरी बातें कही गई हैं:

  • प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल में पानी पीते रहें।
  • घर से बाहर निकलते समय ओआरएस (ORS), नींबू पानी, छाछ या नारियल पानी का सेवन फायदेमंद रहेगा।
  • दोपहर के समय जब धूप सबसे तेज हो, तब गैर-जरूरी बाहरी काम करने से बचें।
  • हल्के रंग के, ढीले और सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर का तापमान नियंत्रित रहे।
  • धूप में निकलते समय सिर को सूती गमछे, टोपी या छतरी से ढकें।

खानपान में बदलाव और भोजन की सुरक्षा

एडवाइजरी में बताया गया है कि बढ़ते तापमान में भोजन बहुत जल्दी खराब हो जाता है, जिससे फूड पॉइजनिंग का खतरा रहता है। बासी खाना खाने से बचें और बना हुआ खाना हमेशा सुरक्षित तापमान पर रखें। अधिक प्रोटीन और तेल-मसाले वाले भारी भोजन की जगह सुपाच्य आहार लें। खीरा, ककड़ी और तरबूज जैसे पानी की प्रचुर मात्रा वाले मौसमी फल और सब्जियों को अपनी डाइट में शामिल करें।

कमजोर वर्ग के लोगों पर रखें खास नजर

नवजात शिशु, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और पहले से दिल या हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी से जूझ रहे लोगों पर अल नीनो जनित गर्मी का असर ज्यादा घातक हो सकता है। ऐसे लोगों को धूप में सीधे जाने से रोकने और उनके पर्याप्त जलयोजन (हाइड्रेशन) का ध्यान रखने की अपील की गई है। राज्य के सभी प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में ओआरएस के पैकेट, जीवनरक्षक दवाएं और जरूरी चिकित्सीय इंतजाम पूरे रखने के निर्देश दिए गए हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

अल नीनो का आम लोगों की सेहत पर क्या प्रभाव पड़ता है?

अल नीनो के कारण बारिश कम होती है और तापमान बढ़ता है। इससे पेयजल की गुणवत्ता खराब होने से पेट के संक्रमण और लू व डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ती है।

पानी उबालकर पीना क्यों जरूरी बताया गया है?

सूखे और जल संकट के समय भूमिगत जल और खुले स्रोतों में बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है। पानी उबालने से हानिकारक रोगाणु नष्ट हो जाते हैं।

हीट स्ट्रोक या डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखने पर क्या करें?

चक्कर आना, अत्यधिक प्यास, सिरदर्द या उल्टी होने पर तुरंत ठंडी छायादार जगह पर बैठें, ओआरएस का घोल लें और तत्काल नजदीकी सरकारी अस्पताल में डॉक्टर को दिखाएं।

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