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रवि, 1 नवंबर 2026अपडेट 07:30 PM IST
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गाड़ी की ओनरशिप ट्रांसफर कैसे करें? जानें ऑनलाइन प्रोसेस और जरूरी डॉक्यूमेंट्स

पुरानी गाड़ी खरीदने या बेचने के बाद उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) अपने नाम ट्रांसफर कराना कानूनी रूप से बेहद जरूरी है। परिवहन पोर्टल के जरिए आप घर बैठे ऑनलाइन ओनरशिप ट्रांसफर के लिए आवेदन कर सकते हैं।

Ashish ·
प्रतीकात्मक तस्वीर — फोटो: AymaneJed / Pixabay

गाड़ी की ओनरशिप ट्रांसफर: पुरानी गाड़ी (कार या बाइक) खरीदते या बेचते समय केवल पैसों का लेन-देन और गाड़ी की चाबी सौंपना ही काफी नहीं होता है। जब तक वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर नहीं हो जाता, तब तक वाहन से जुड़े कानूनी और वित्तीय उत्तरदायित्व पुराने मालिक के पास ही रहते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट के नियमों के अनुसार गाड़ी बिकने के एक निश्चित समय के भीतर ओनरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के परिवहन (Parivahan) पोर्टल ने इस पूरी प्रक्रिया को काफी हद तक ऑनलाइन और आसान बना दिया है।

गाड़ी की ओनरशिप ट्रांसफर: मुख्य बातें: गाड़ी ओनरशिप ट्रांसफर एक नजर में

बिंदु जानकारी
आवेदन का माध्यम परिवहन सेवा पोर्टल (vahan.parivahan.gov.in)
निर्धारित समय-सीमा गाड़ी बिक्री के 14 से 30 दिन के भीतर (राज्य के नियमों के अनुसार)
मुख्य फॉर्म फॉर्म 29 और फॉर्म 30
अनुमानित फीस दुपहिया वाहन के लिए करीब ₹150 और चार पहिया वाहन के लिए ₹300 (स्मार्ट कार्ड चार्ज अतिरिक्त)
आधिकारिक वेबसाइट parivahan.gov.in

ओनरशिप ट्रांसफर के लिए जरूरी दस्तावेज

ऑनलाइन आवेदन करते समय या आरटीओ में सत्यापन के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। इन्हें पहले से तैयार रखने से प्रक्रिया में रुकावट नहीं आती है:

  • वाहन की मूल आरसी (Original RC)
  • वैध मोटर बीमा प्रमाण पत्र (Valid Insurance)
  • पीयूसी (PUC) सर्टिफिकेट
  • फॉर्म 29 (विक्रेता द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस) और फॉर्म 30 (खरीददार व विक्रेता द्वारा भरा गया आवेदन)
  • खरीददार और विक्रेता का पहचान पत्र तथा पता प्रमाण (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड)
  • यदि वाहन पर कोई बैंक लोन था, तो बैंक का एनओसी (Form 35)
  • गाड़ी दूसरे राज्य में ट्रांसफर हो रही है तो फॉर्म 28 (NOC)

ऑनलाइन आरसी ट्रांसफर करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

  1. सबसे पहले सड़क परिवहन मंत्रालय के आधिकारिक वाहन परिवहन पोर्टल पर जाएं।
  2. होमपेज पर ऑनलाइन सर्विसेज में जाकर 'वहीकल रिलेटेड सर्विसेज' (Vehicle Related Services) विकल्प को चुनें।
  3. अपने राज्य का चयन करने के बाद गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर और चेसिस नंबर के आखिरी अंक दर्ज करके ओटीपी सत्यापित करें।
  4. अब सर्विस मेनू में से 'Transfer of Ownership' (ओनरशिप ट्रांसफर) के विकल्प पर क्लिक करें।
  5. नए मालिक (खरीददार) का पूरा नाम, पता, मोबाइल नंबर और बिक्री की तारीख व कीमत जैसी जानकारियां सही-सही भरें।
  6. यदि राज्य में फेसलेस या आधार ई-केवाईसी की सुविधा उपलब्ध है, तो दोनों पक्ष डिजिटल हस्ताक्षर या ओटीपी के माध्यम से प्रक्रिया पूरी करें। अन्यथा फॉर्म का प्रिंट निकालकर उस पर भौतिक हस्ताक्षर करें।
  7. दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली (DMS) पर मांगे गए सभी दस्तावेजों की स्कैन की हुई साफ कॉपी अपलोड करें।
  8. नियमों के अनुसार निर्धारित ट्रांसफर फीस का भुगतान ऑनलाइन माध्यम (यूपीआई, नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड) से करें और रसीद संभाल कर रखें।
  9. यदि आपका आवेदन नॉन-फेसलेस श्रेणी में आता है, तो सभी मूल दस्तावेजों की फाइल लेकर अपने नजदीकी आरटीओ कार्यालय में सत्यापन के लिए जमा करें।

समय पर ट्रांसफर न कराने के नुकसान

गाड़ी बेचने के बाद आरसी ट्रांसफर समय पर न कराने पर कई तरह की कानूनी और वित्तीय समस्याएं आ सकती हैं। यदि गाड़ी से कोई दुर्घटना हो जाती है या ट्रैफिक नियम का उल्लंघन होता है, तो उसका चालान या कानूनी जिम्मेदारी पुराने मालिक पर ही बनी रहती है। इसके अलावा, तय समय सीमा बीत जाने के बाद आरटीओ द्वारा लेट फीस या जुर्माना भी वसूला जा सकता है। इसलिए गाड़ी बिकते ही तुरंत ओनरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या गाड़ी ओनरशिप ट्रांसफर के लिए आरटीओ जाना जरूरी है?

कई राज्यों में अब डिजिटल और आधार आधारित ई-केवाईसी (फेसलेस सर्विस) की सुविधा है, जिससे घर बैठे काम हो जाता है। हालांकि, कुछ मामलों या आरटीओ के नियमों के तहत दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन के लिए एक बार आरटीओ जाना पड़ सकता है।

अगर गाड़ी पर पहले से लोन था, तो क्या करें?

यदि वाहन पर बैंक का लोन चल रहा था, तो ओनरशिप ट्रांसफर से पहले लोन पूरी तरह चुकाना होगा। लोन क्लोज होने के बाद बैंक से एनओसी (NOC) और फॉर्म 35 प्राप्त करना अनिवार्य है, जिसे आवेदन के साथ लगाना होता है।

ओनरशिप ट्रांसफर की प्रक्रिया पूरी होने में कितना समय लगता है?

सारे दस्तावेज सही पाए जाने और ऑनलाइन फीस भरने के बाद आमतौर पर 7 से 30 कार्य दिवसों के भीतर आरसी अप्रूव होकर नए मालिक के पते पर स्पीड पोस्ट द्वारा भेज दी जाती है।

क्या बिना इंक्लूडेट इन्श्योरेंस के आरसी ट्रांसफर हो सकती है?

नहीं, वाहन का बीमा वैध होना अनिवार्य है। ओनरशिप ट्रांसफर के आवेदन से पहले वाहन का बीमा भी नए मालिक के नाम पर ट्रांसफर करवाना जरूरी होता है।

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