धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध कर्म हमेशा दोपहर के समय करना सबसे उत्तम माना गया है। इसके लिए 'कुतुप मुहूर्त' या 'अपराह्न काल' का समय सबसे उपयुक्त होता है।
घर पर श्राद्ध की प्रक्रिया शुरू करने से पहले स्नान करके पवित्र हो जाएं और दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें। इसके बाद जल में काले तिल, जौ और कुशा मिलाकर तर्पण किया जाता है।
श्राद्ध का भोजन तैयार होने के बाद 'पंचबलि' निकालना अनिवार्य माना गया है। इसमें भोजन का कुछ अंश निम्नलिखित जीवों और देवताओं के लिए निकाला जाता है:
पंचबलि निकालने के बाद योग्य ब्राह्मण को घर आमंत्रित कर भोजन कराना चाहिए।
श्राद्ध और तर्पण के इन दिनों में मन और शरीर की पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। इस दौरान घर में पूरी तरह सात्विक आचरण रखना उत्तम माना गया है।
सनातन संस्कृति में पितरों की आत्मा की शांति और उनके प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए श्राद्ध और तर्पण का विधान है। जानिए इसे घर पर सही विधि से करने के नियम।