वैदिक ज्योतिष के ग्रंथों में उल्लेख है कि जब चंद्रमा और मंगल एक ही भाव या राशि में एक साथ युति करते हैं, अथवा एक-दूसरे पर परस्पर दृष्टि डालते हैं, तो चंद्र-मंगल योग बनता है।
कर्क राशि का स्वामित्व स्वयं चंद्रमा के पास है, जबकि मंगल ग्रह के लिए कर्क को नीच राशि माना जाता है।
ज्योतिषीय परंपरा में ग्रहों के इस गोचर का असर अलग-अलग राशियों पर भिन्न माना जाता है:
चंद्रमा मन का कारक है और मंगल आक्रामकता का। दोनों के साथ होने पर कई बार जल्दबाजी में निर्णय लेने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है।
पंचांग गणनाओं के अनुसार 1 नवंबर 2026 को कर्क राशि में चंद्रमा और मंगल की युति होने जा रही है। वैदिक ज्योतिषीय परंपरा में इस खगोलीय संयोग को चंद्र-मंगल योग के नाम से जाना जाता है।