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Judiciary Exam Eligibility 2026: जानिए योग्यता, आयु सीमा और नए नियम

भारत में जज बनने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए ज्युडिशरी परीक्षा की योग्यता, आयु सीमा, नए प्रैक्टिस नियमों और चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी यहाँ दी गई है।

Ashish ·
फोटो: ख़बरें लाइव

भारतीय न्यायपालिका में सीधे सिविल जज (जूनियर डिविजन) या मजिस्ट्रेट के पद पर चयनित होना कानून के स्नातकों (Law Graduates) के लिए एक प्रतिष्ठित और जिम्मेदारी भरा करियर विकल्प है। विभिन्न राज्यों द्वारा आयोजित की जाने वाली न्यायिक सेवा परीक्षा (Judicial Services Examination) के माध्यम से योग्य युवाओं का चयन किया जाता है। हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों के बाद इस परीक्षा के नियमों और प्रैक्टिस की अनिवार्यता में कुछ अहम बदलाव किए गए हैं, जिनके बारे में हर आकांक्षी को पता होना चाहिए।

Judiciary Exam 2026: मुख्य बातें एक नजर में

बिंदु जानकारी
शैक्षणिक योग्यता मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से एलएलबी (LLB - 3 या 5 वर्ष) की डिग्री
आयु सीमा सामान्यतः 21 से 35 वर्ष (आरक्षित श्रेणियों को नियमानुसार छूट)
प्रैक्टिस नियम 31 मार्च 2027 तक के विज्ञापनों के लिए फ्रेश ग्रेजुएट्स भी पात्र (संशोधित नियमों के तहत)
चयन प्रक्रिया प्रीलिम्स परीक्षा, मेन्स परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू)
संचालन निकाय संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय या राज्य लोक सेवा आयोग (PSC)

शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के नियम

लोअर ज्युडिशरी (Lower Judiciary) यानी सिविल जज परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवार के पास भारत में विधि द्वारा स्थापित किसी भी विश्वविद्यालय से तीन वर्षीय या पांच वर्षीय एलएलबी (LLB) की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही कई राज्यों में बार काउंसिल (Bar Council) के तहत अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण की आवश्यकता भी होती है।

आयु सीमा की बात करें तो अधिकांश राज्यों में आवेदन के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 35 वर्ष तय की गई है। हालांकि, अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिलाओं को राज्य सरकार के नियमों के अनुसार ऊपरी आयु सीमा में छूट प्रदान की जाती है।

वकालत के अनुभव (Practice Rule) से जुड़े नए बदलाव

न्यायिक सेवा परीक्षाओं के लिए वकालत के अनुभव के नियमों में हाल ही में संशोधन किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, 31 मार्च 2027 तक आने वाले भर्ती विज्ञापनों के लिए फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स भी बिना किसी पूर्व वकालत के अनुभव के आवेदन करने के पात्र हैं। इसके बाद के विज्ञापनों के लिए एक वर्ष के सक्रिय अभ्यास या तयशुदा नियमों का पालन करना होगा। चयनित होने वाले उम्मीदवारों को जुडिशल अकादमी में प्रशिक्षण और संरचित क्लर्कशिप से गुजरना होता है।

चयन प्रक्रिया के तीन चरण

राज्य न्यायिक सेवा परीक्षाएं आमतौर पर तीन चरणों में पूरी होती हैं:

  1. प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): यह बहुविकल्पीय प्रश्नों (MCQs) की छंटनी परीक्षा होती है, जिसमें सामान्य ज्ञान, कानून के मूल सिद्धांत और समसामयिक मामले पूछे जाते हैं।
  2. मुख्य परीक्षा (Mains): यह वर्णनात्मक (Descriptive) लिखित परीक्षा होती है, जिसमें विभिन्न कानूनों (सब्स्टेंटिव और प्रोसीजरल लॉ) पर विस्तृत ज्ञान और लेखन क्षमता की परीक्षा ली जाती है।
  3. साक्षात्कार (Interview): लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को व्यक्तित्व परीक्षण और विधिक समझ के अंतिम चरण के साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है।

आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • एलएलबी (LLB) की डिग्री और मार्कशीट
  • मैट्रिकुलेशन या जन्म प्रमाण पत्र (आयु सत्यापन के लिए)
  • राज्य बार काउंसिल का रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र (यदि राज्य के नियमों के तहत अनिवार्य हो)
  • जाति या श्रेणी प्रमाण पत्र (यदि आयु में छूट का दावा करना हो)
  • पहचान पत्र (आधार कार्ड, वोटर आईडी आदि) और पासपोर्ट साइज फोटो

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या अंतिम वर्ष के एलएलबी छात्र ज्युडिशरी परीक्षा दे सकते हैं?

कुछ राज्यों में एलएलबी के अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर के छात्र भी परीक्षा फॉर्म भरने के पात्र होते हैं, बशर्ते वे मुख्य परीक्षा या चयन प्रक्रिया के निश्चित चरण से पहले अपनी डिग्री पूरी कर लें। हालांकि, यह नियम राज्य विशेष के विज्ञापनों पर निर्भर करता है।

क्या परीक्षा के लिए कोई भाषा की बाध्यता होती है?

हाँ, प्रत्येक राज्य की न्यायिक सेवा परीक्षा में उस राज्य की स्थानीय भाषा या राजभाषा का एक अलग पेपर होता है, और कई राज्यों में मुख्य परीक्षा के उत्तर स्थानीय भाषा या अंग्रेजी में लिखने का विकल्प होता है।

क्या देश भर के लिए कोई एक ही ज्युडिशरी परीक्षा होती है?

नहीं, भारत में कोई अखिल भारतीय न्यायिक सेवा (All India Judicial Services) परीक्षा नहीं है। देश के अलग-अलग राज्य अपने यहाँ के उच्च न्यायालय या लोक सेवा आयोग के माध्यम से स्वतंत्र रूप से परीक्षाएं आयोजित करते हैं।

चयन के बाद शुरुआती पद और प्रमोशन कैसे होते हैं?

परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवार सबसे पहले सिविल जज (जूनियर डिविजन) या न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त होते हैं। इसके बाद अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर सीनियर डिविजन, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) और जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पदों पर पदोन्नति मिलती है।

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