RBSK Scheme 2026: बच्चों की मुफ्त जांच और इलाज के लिए जानिए पूरी जानकारी
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के जरिए सरकार बच्चों की शुरुआती स्वास्थ्य समस्याओं, जन्मजात विकारों और बीमारियों की मुफ्त जांच और इलाज उपलब्ध कराती है।
देश में बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और जन्मजात बीमारियों का समय पर इलाज करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) चलाया जा रहा है। इस योजना के तहत नवजात शिशुओं से लेकर 18 साल तक के बच्चों की स्वास्थ्य जांच और कई तरह के गंभीर रोगों का इलाज बिल्कुल मुफ्त किया जाता है। कई बार माता-पिता को बच्चों की गंभीर बीमारियों या विकलांगता के इलाज का खर्च उठाने में कठिनाई होती है, ऐसे में यह योजना एक बड़ा संबल बनती है।
RBSK Scheme 2026: मुख्य बातें एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| योजना का नाम | राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) |
| किसके द्वारा संचालित | राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय |
| लाभार्थी | जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के सभी बच्चे |
| जांच और इलाज का खर्च | पूरी तरह मुफ्त (निःशुल्क) |
| मुख्य फोकस | 4 'Ds' (जन्मजात विकार, बीमारियां, कमियां और विकास में देरी) |
| आधिकारिक वेबसाइट | rbsk.mohfw.gov.in |
आरबीएसके योजना क्या है और किसे मिलता है लाभ?
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों में जन्म के समय मौजूद कमियों, बचपन की बीमारियों, पोषण की कमी और विकास से जुड़ी बाधाओं की समय रहते पहचान करना है।
इस योजना के तहत जन्म से लेकर 18 वर्ष की आयु तक के बच्चों को शामिल किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से तीन श्रेणियां आती हैं: सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्र, आंगनवाड़ी केंद्रों के बच्चे और जन्म के तुरंत बाद के नवजात शिशु। इन सभी बच्चों की स्वास्थ्य जांच के लिए विशेष मोबाइल हेल्थ टीमें बनाई गई हैं जो समय-समय पर स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों का दौरा करती हैं।
योजना के तहत किन मुख्य बीमारियों और समस्याओं की होती है जांच?
इस कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 30 से अधिक स्वास्थ्य स्थितियों और बीमारियों को शामिल किया गया है, जिन्हें मुख्य रूप से चार श्रेणियों (4 Ds) में बांटा गया है:
- जन्मजात विकार (Defects at Birth): दिल में छेद (Congenital Heart Disease), कटे हुए होंठ और तालू, क्लब फुट (टेड़े-मेड़े पैर), डाउन सिंड्रोम और जन्मजात बहरापन या अंधापन।
- बचपन की बीमारियां (Diseases in Children): त्वचा के रोग, कान का संक्रमण (Otitis Media), rheumatic heart disease और बच्चों से जुड़ी अन्य सामान्य बीमारियां।
- पोषण संबंधी कमियां (Deficiencies): एनीमिया (खून की कमी), विटामिन ए और डी की कमी, गंभीर कुपोषण (SAM) और घेंघा रोग।
- विकास में देरी और विकलांगता (Developmental Delays & Disabilities): दृष्टि या श्रवण बाधित होना, ऑटिज्म, सीखने में कठिनाई (Learning Disorder) और मोटर डिले।
जांच और इलाज की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
बच्चों की स्वास्थ्य जांच और उपचार की यह प्रक्रिया बेहद व्यवस्थित ढंग से पूरी की जाती है:
- स्कूली और आंगनवाड़ी स्तर पर स्क्रीनिंग: डेडीकेटेड मोबाइल हेल्थ टीमें (जिनमें डॉक्टर, एएनएम और फार्मासिस्ट होते हैं) साल में कम से कम एक बार स्कूलों और आंगनवाड़ियों में बच्चों की जांच करती हैं।
- शिशुओं की जांच: डिलीवरी पॉइंट (अस्पताल) और आशा कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर नवजात शिशुओं की शुरुआती जांच की जाती है।
- जिला शुरुआती हस्तक्षेप केंद्र (DEIC): यदि किसी बच्चे में कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या या विकार पाया जाता है, तो उसे जिले स्तर पर बने DEIC सेंटर भेजा जाता है।
- अस्पताल में मुफ्त इलाज: जरूरत पड़ने पर बच्चे को बड़े सरकारी अस्पतालों या उच्च चिकित्सीय केंद्रों (Tertiary Care) में रेफर किया जाता है, जहां सर्जरी सहित पूरा इलाज मुफ्त होता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या इस योजना के तहत सर्जरी का खर्च भी सरकार उठाती है?
हाँ, यदि किसी बच्चे को दिल की सर्जरी, कॉक्लियर इम्प्लांट (कान का ऑपरेशन) या अन्य किसी बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता होती है, तो उसका पूरा खर्च इस योजना के तहत सरकार द्वारा उठाया जाता है।
इस योजना के लिए आवेदन कहां करना होता है?
इसके लिए अलग से किसी जटिल फॉर्म को भरने की जरूरत नहीं होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों की जांच स्कूल परिसर में और छोटे बच्चों की जांच आंगनवाड़ी या नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात मोबाइल टीम द्वारा स्वतः की जाती है। यदि किसी अभिभावक को बच्चे में कोई समस्या दिखती है, तो वे सीधे अपने जिले के सरकारी अस्पताल या DEIC केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
इस कार्यक्रम का लाभ लेने के लिए कौन-से दस्तावेज चाहिए?
सामान्य जांच के लिए किसी दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होती। हालांकि, यदि बच्चे को आगे के इलाज या बड़े अस्पताल में रेफर किया जाता है, तो बच्चे का आधार कार्ड, माता-पिता का पहचान पत्र और स्वास्थ्य जांच पर्ची साथ रखनी चाहिए।