रुद्राक्ष धारण करने के नियम और विधि, जानिए सही तरीका
सनातन धर्म में रुद्राक्ष को भगवान शिव का वरदान और अत्यंत पवित्र मनका माना गया है। इसे सही विधि और नियमों के साथ पहनने से ही इसके पूर्ण आध्यात्मिक व मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं।
सनातन संस्कृति में रुद्राक्ष को केवल एक आभूषण या माला नहीं, बल्कि महादेव भगवान शिव का प्रत्यक्ष आशीर्वाद माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसकी उत्पत्ति शिव जी के आंसुओं से हुई है। इसे धारण करने से मन को शांति, नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। हालांकि, इसके चमत्कारी लाभ तभी मिलते हैं जब इसे पूरे विधि-विधान और तय नियमों के अनुसार पहना जाए।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| शुभ दिन | सोमवार, प्रदोष व्रत, शिवरात्रि या सावन का महीना |
| प्रमुख धातु | लाल, पीला या काला धागा, अथवा चांदी और सोने की चैन |
| जाप मंत्र | 'ॐ नमः शिवाय' (कम से कम 108 बार) |
| मुख्य सावधानी | अशुद्धता, मांस-मदिरा के सेवन और सोते समय इसे उतार देना चाहिए |
रुद्राक्ष धारण करने के लिए सही दिन और समय
किसी भी रुद्राक्ष को अचानक से किसी भी दिन गले में नहीं डाल लेना चाहिए। इसे पहनने के लिए सप्ताह का सोमवार दिन सबसे उत्तम माना जाता है। इसके अलावा महाशिवरात्रि, सावन मास या किसी भी शुभ मुहूर्त में इसे धारण करना अत्यंत फलदायी होता है। सुबह के समय स्नान करने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके ही इसकी शुरुआत करें।
रुद्राक्ष को प्राण-प्रतिष्ठित और शुद्ध करने की विधि
बाजार से लाए गए रुद्राक्ष को सीधे गले में पहनने से पहले उसकी शुद्धि करना जरूरी है। रुद्राक्ष की शुद्धि और प्राण-प्रतिष्ठा की चरणबद्ध प्रक्रिया नीचे दी गई है:
- सबसे पहले रुद्राक्ष को एक साफ बर्तन में गंगाजल और कच्चे दूध से स्नान कराएं।
- इसके बाद इसे सादे साफ जल से धोकर किसी सूती या स्वच्छ कपड़े से अच्छी तरह पोंछ लें।
- अब इसे घर के मंदिर में भगवान शिव की तस्वीर या शिवलिंग के सामने एक पवित्र आसन पर रखें।
- रुद्राक्ष पर चंदन का तिलक लगाएं और धूप-दीप दिखाकर पुष्प अर्पित करें।
- पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें और रुद्राक्ष की माला या मनके पर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें।
- इसके बाद इसे अपने मनपसंद पवित्र धागे (लाल या पीला) अथवा चांदी या सोने की चैन में पिरोकर गले में धारण कर लें।
धारण करने के बाद किन नियमों का रखें ध्यान?
रुद्राक्ष पहनने के बाद कुछ खास बातों का हमेशा पालन करना चाहिए ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे। जिस व्यक्ति ने रुद्राक्ष धारण किया है, उसे सात्विक जीवनशैली का पालन करना चाहिए। मांस, मदिरा और तामसिक भोजन के सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए। इसके अलावा, सोते समय रुद्राक्ष को उतारकर किसी सुरक्षित और पवित्र स्थान पर रख देना चाहिए।
किन बातों में बरतें विशेष सावधानी?
अक्सर लोग जानकारी के अभाव में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जिससे रुद्राक्ष का नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। कषाय या दूषित हाथों से रुद्राक्ष को बार-बार नहीं छूना चाहिए। किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पहना हुआ रुद्राक्ष अपनाकर खुद नहीं पहनना चाहिए। यदि आप किसी सूतक काल या शोक सभा में जा रहे हैं, तो वहां जाने से पहले रुद्राक्ष उतारकर घर के मंदिर में रख देना बेहतर माना जाता है।
यह भी पढ़ें: रुद्राक्ष धारण करने के नियम और लाभ, जानिए सही तरीका और सावधानियां | घर में शंख बजाने के नियम और महत्व, जानिए सही तरीका | आज का पंचांग 5 नवंबर 2026: जानिए रमा एकादशी व्रत, शुभ मुहूर्त और राहुकाल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या महिलाएं भी रुद्राक्ष धारण कर सकती हैं?
हाँ, शास्त्रों के अनुसार महिलाएं और पुरुष दोनों ही रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं। बस उन्हें शुद्धता और पवित्रता से जुड़े नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
एक समय में कितने रुद्राक्ष पहने जा सकते हैं?
आप चाहें तो एक अकेला मुखी रुद्राक्ष या फिर अलग-अलग मुखियों के 27, 54 या 108 मनकों की माला बनाकर भी गले में धारण कर सकते हैं। यह पूरी तरह आपकी श्रद्धा पर निर्भर करता है।
क्या सोते समय रुद्राक्ष पहना जा सकता है?
सामान्यतः सोते समय रुद्राक्ष उतारकर तकिए के नीचे या पूजा स्थल पर रख देना उचित माना जाता है, ताकि सोते वक्त उसपर दबाव न पड़े और उसकी पवित्रता बनी रहे।